मंगलवार, 29 मार्च 2022

बाज और पेंगुइन

 

समुद्र के किनारे खड़े एक पेंगुइन ने जब ऊँचे आसमान में उड़ते बाज को देखा तो सोचने लगा-

“बाज भी क्या पक्षी है…कितने शान से खुले आकाश में घूमता है…और एक मैं हूँ जो चाहे जितना भी पंख फड़-फड़ा लूँ ज़मीन से एक इंच ऊपर भी नहीं उठ पाता…”

और ऐसा सोच कर वह कुछ उदास हो गया.

ठीक इसी पल बाज ने भी पेंगुइन को नीचे समुद्र में तैरते हुए देखा…और सोचने लगा, “ये पेंगुइन भी क्या कमाल का पक्षी है… जो धरती की सैर भी करता है और समुद्र की गहराइयों में गोता भी लगाता है… और यहाँ मैं…बस यूँही इधर-उधर उड़ता फिरता हूँ!”

जानते हैं इसके बाद क्या हुआ?

कुछ नहीं… बाज आकाश की ऊँचाइयों में खो गया और पेंगुइन समद्र की गहराइयों में… दोनों अपनी मन में आये नेगेटिव थॉट्स को भूल गए और बिना समय गँवाए भगवान की दी हुई उस ताकत को… उस शक्ति को प्रयोग करने लगे जिसके साथ वो पैदा हुए थे.

सोचिये अगर वो बाज और पेंगुइन बाज और पेंगुइन न होकर इंसान होते तो क्या होता?

बाज यही सोच-सोच कर परेशान होता कि वो पानी के अन्दर तैर नहीं सकता और पेंगुइन दिन-रात बस यही सोचता कि काश वो आकाश में उड़ पाता… और इस चक्कर में वे दोनों ही अपनी-अपनी existing strengths या skills सही ढंग से use नहीं कर पाते.

काश हम इंसान भी इन पक्षियों से सीख पाते कि ईश्वर ने हर किसी के अन्दर अलग-अलग गुण दिए हैं… हर किसी ने अलग-अलग क्षमताओं के साथ जन्म लिया है और हर इंसान किसी दुसरे इंसान से किसी ना किसी रूप में बेहतर है. But unfortunately, बहुत से लोगों का ध्यान अपनी competencies की बजाय दूसरों की achievements पर ही लगा रहता है, जिसे देखकर वे जलते हैं और अपनी energy गलत जगह लगाते हैं.

आप क्या करते हैं?

क्या आपको पता है कि आपके अन्दर सबसे अच्छी बात क्या है? क्या आपने कभी कोशिश की है उस strength को जानने और निखारने की जिसके साथ ईश्वर ने आपको भेजा है?

अगर नहीं की है तो करिए, उस gifted skill… उस strength को समझिये…अपनी ताकत को पहचानिए और उसे अपनी मेहनत से इतना निखारिये कि औरों की नज़र में आप एक achiever बन पाएं या नहीं लेकिन अपनी और उस ऊपर वाले की नज़र में आप एक champion ज़रूर बन जाएं!

ये लूँ कि वो? निर्णय लेने पर कहानी

 एक पांच साल का लड़का अपने पापा के साथ दिल्ली की एक सुपरमार्केट में घूमने गया. जब शॉपिंग करते-करते वे टॉयज सेक्शन के करीब पहुंचे तो वहन मौजूद रंग-बिरंगे खिलौनों को देखकर उसका जी मचल गया.

“पापा-पापा… मुझे ये कार लेना है…प्लीज न पापा”, लड़के ने पापा का हाथ खींचते हुए कहा.

पापा अपने बेटे को बहुत मानते थे और उसकी ये रिक्वेस्ट ठुकरा नहीं पाए.

“ठीक है बेटा तुम ये कार ले लो!”, पापा ने बेटे को पुचकारते हुए कहा.

बच्चे ने झट से कार उठा ली और ख़ुशी से झूमता हुआ आगे बढ़ने लगा. अभी वो दो-चार ही कदम चले होंगे कि बेटा बोला, ” पापा, मुझे ये कार नहीं चाहिए…मुझे तो वो रिमोट कण्ट्रोल हेलीकाप्टर चाहिए!”

यह सुनते ही पापा कुछ गुस्सा हो गए और बोले, ” हमारे पास अधिक टाइम नहीं है, मार्केट बंद होने वाला है… जल्दी से खिलौना लो और यहाँ से चलो!”

बेटे ने कार रखी और हेलीकाप्टर को अपने कब्जे में लेकर इतराने लगा.

पापा ने बेटे का हाथ पकड़ा और आगे बढ़ने लगे की तभी बेटा जोर से बोला, ” रुको-रुको-रुको पापा, वो देखो वो डायनासौर कितना खतरनाक लग रहा है… मैं वो ले लूँ क्या…बाताओ ना पापा… क्या करूँमैं… ये लूँ कि वो ?”

पापा ने बेटे को फ़ौरन गोद से उतार दिया और कहा, “जाओ…जल्दी से कोई खिलौना चूज कर लो और यहाँ से चलो!”

अगले कुछ पलों तक बेटा इधर-उधर दौड़ता रहा और यही सोचता रहा कि ये लूँ कि वो ? पर वो डिसाइड नहीं कर पाया कि उसे क्या लेना है?

तभी सुपरमार्केट की लाइट्स ऑफ होने लगीं और कस्टमर्स को बाहर निकलने के लिए कहा जाने लगा. पापा भी गुस्से में थे, उन्होंने बेटे को गोद में उठाया और बाहर निकल पड़े. बेचारा बेटा रोता रह गया, उसके मन में यही आ रहा था कि काश उसने कोई टॉय चूज कर लिया होता.

दोस्तों, हम सभी उस लड़के की तरह हैं और ये दुनिया खिलौनों की एक दूकान है, जिसमे हर तरह के ढेरों खिलौने मौजूद हैं… life आपको अलग-अलग स्टेज पे टॉयज की ढेर सारी choices देती है.

कभी आपको education, कभी job या business तो कभी relationship choose करने का option देती है, but unfortunately बहुत से लोग कोई ठोस निर्णय लेने की बजाय यही सोचते रहते हैं किये लूँ कि वो?

  • ये पढाई करूँ कि वो?
  • ये जॉब करूँ कि वो?
  • ये बिजनेस करूँ कि वो?
  • इससे शादी करूँ कि उससे?

और इसी चक्कर में कुछ करने का उनका prime time निकल जाता है और बाद में उन्हें उस बच्चे की तरह पछताना पड़ता है या sub-standard option choose करना पड़ता है.

इस बात को याद रखिये कि-

कोई भी निर्णय ना लेने से अच्छा है कोई ग़लत निर्णय लेना!

इसलिए जब life के important decisions लेने की बात हो तब indecisive मत बने रही…अपने निर्णय को लम्बे समय तक टालिये नहीं. अपने circumstances और best of knowledge को use करते हुए एक निर्णय लीजिये और ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाइए

 

 

 

प्रभु यीशु के जन्म की कहानी

 लगभग 2000 साल पहले जब यहूदिया (Judea), जो अब इजराइल का हिस्सा है; में राजा हेरोदेस (King Herod) का शासन था, तब परमेश्वर ने गेब्रियल (Gabriel) नाम के एक फ़रिश्ते को नासरत (Nazareth) में रहने वाली एक युवा महिला के पास भेजा. उसका नाम मरियम (Mary) था और उसकी शादी युसुफ (Joseph) नाम के एक नवयुवक से होने वाली थी.

गेब्रियल ने मरियम से कहा, “ पीस बी विथ यू! परमेश्वर तुमसे खुश हैं और उन्होंने तुम्हे आशीर्वाद दिया है!”

मरियम फ़रिश्ते को देखकर आश्चर्यचकित थी, और सोच रही थी की फ़रिश्ते की बात का क्या मतलब है.

फ़रिश्ते ने कहा,

डरो मत , ईश्वर की तुम पर बड़ी कृपा है. तुम एक पवित्र आत्मा के माध्यम से गर्भवती होगी और एक बालक को जन्म दोगी और उसे तुम यीशु  (Jesus) कह कर पुकारोगी. वो परमेश्वर का अपना पुत्र होगा और उसका राज्य कभी ख़त्म नहीं होगा.

मरियम डरी हुई थी लेकिन उसको ईश्वर पर भरोसा था.

वही हो जो भगवान ने चाहा है.

मरियम ने फ़रिश्ते को जवाब दिया.

गेब्रियल ने मरियम से ये भी बताया कि उसकी कज़न एलिज़ाबेथ, जिसे सब लोग मानते थे कि अब वो माँ नहीं बन सकती, को भी एक पुत्र होगा जिसे ईश्वर ने यीशु का मार्ग तैयार करने के लिए चुना है.

इसके बाद मरियम ने अपने परिवार को अलविदा कहा और अपनी कज़न एलिज़ाबेथ और उसके पति जकर्याह (Zechariah) से मिलने गयी. एलिज़ाबेथ मरियम को देख कर बहुत खुश हो गयी. उसे पहले से पता था कि मरियम को ईश्वर के पुत्र की माँ बनने के लिए चुना गया है.

दरअसल, एक फ़रिश्ते ने पहले ही जकर्याह को बता दिया था कि भविष्य में एलिज़ाबेथ का पुत्र ही लोगों को यीशु के स्वागत के लिए तैयार करेगा और उसका नाम जॉन होगा. मरियम अगले तीन महीनो तक एलिज़ाबेथ के साथ रही और फिर वापस नासरत चली गयी.

जब युसुफ को पता चला कि उसकी होने वाले बीवी पहले से ही गर्भवती है तो उसे चिंता होने लगी. वह सोचने लगा कि क्या उसे इस शादी के लिए मना कर देना चाहिए. पर जल्द ही उसे भी एक फ़रिश्ते ने सपने में आकर यीशु के जन्म की बात बता दी और उसे शादी से ना डरने की सलाह दी. इसके बाद युसुफ ने मरियम से शादी कर ली.

उस समय, मरियम और युसुफ जहाँ रहते थे वो रोमन एम्पायर का हिस्सा था और ऑगस्टस (Augustus) उनका राजा था. राजा चाहता था कि उसके राज्य में जितने भी लोग हैं उनके नाम की एक लिस्ट तैयार की जाए ताकि हर किसी से टैक्स वसूला जा सके.

उसने आदेश दिया कि हर किसी को उस जगह पर लौटना होगा जहाँ का वह मूल निवासी है और अपना एक रजिस्टर में दर्ज कराना होगा.

इसके बाद मरियम और युसुफ नासरत से 70 मील की यात्रा करके बेतलेहेम (Bethlehem) पहुंचे, क्योंकि युसुफ वहीँ का मूल निवासी था.
यह यात्रा वैसे ही कठिन थी पर मरियम के गर्भवती होने के कारण यह और भी मुश्किल हो गयी थी.

जब वे बेतलेहेम पहुंचे तो नाम रजिस्टर करवाने के लिए वहां पहले से ही इतनी भीड़ थी कि उन्हें वहां रहने की कोई सही जगह ही नहीं मिली.
ठहरने की एकमात्र जगह जो से ढूंढ पाए वो थी जानवरों के बीच.

 

 

छोटे बच्चों के लिए नयी कहानियाँ

 दोस्तों, आज हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं 6 छोटी-छोटी कहानियां जो बच्चों को बहुत पसंद आती हैं. आप इन कहानियों को अपने नन्हे-मुन्नों को सोते वक़्त सुना सकते हैं और इनसे मिलने वाली सीख के बारे में उनसे प्रश्न कर सकते हैं. तो आइये देखते हैं इन short kids stories in Hindi को.

Kids Stories in Hindi #1: साधू की झोपड़ी

एक गाँव के पास दो साधू अपनी अपनी झोपड़ियाँ बना कर रहते थे। दिन के वक्त वह दोनों गाँव जा कर भिक्षा मांगते और उसके बाद पूरा दिन पूजा-पाठ करते थे। एक दिन भारी तूफान और आँधी आने के कारण उनकी झोपड़ियाँ जगह-जगह से टूट-फूट गयीं और बहुत हद तक बर्बाद हो गयीं।

पहला साधू यह सब देख कर दुख के मारे विलाप करने लगा और बोला,

हे ईश्वर ! तूने मेरे साथ यह अनर्थ क्यों किया। क्या मेरी भक्ति, तप, जप और पूजा का यही पुरस्कार है ?

इस तरह वह पूरा दिन बड़बड़ाते हुए, अपना जी जलाते हुए वहीं एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

तभी वहाँ दूसरा साधू आ पहुंचा। उसने अपनी बर्बाद जोपड़ी देखी तो वह मुस्कुराने लगा। और उसी वक्त ऊपरवाले का धन्यवाद करने लगा। उसने कहा कि-

ऐसे भीषण तूफान में तो पक्के मकान भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं पर तूने तो मेरी आधी झोपड़ी बचा ली। आज यह बात सिद्ध हो गयी की तू मेरी भक्ति से कितना प्रसन्न है। और तेरी मुझ पर कितनी बड़ी कृपा है।

सीख हर अच्छी बुरी घटना के दो पहलू होते हैं। बुरा निष्कर्ष निकालना, या अच्छा अर्थ निकालना यह आप के हाथ में है।

Kids Stories in Hindi #2: घास, बकरी और भेड़िया

एक बार की बात है एक मल्लाह  के पास घास का ढेर, एक बकरी और एक भेड़िया होता है। उसे इन तीनो को नदी के उस पार लेकर जाना होता है। पर नाव छोटी होने के कारण वह एक बार में किसी एक चीज को ही अपने साथ ले जा सकता है।

अब अगर वह अपने साथ भेड़िया को ले जाता तो बकरी घास खा जाती।

अगर वह घास को ले जाता तो भेड़िया बकरी खा जाता।

इस तरह वह परेशान हो उठा कि करें तो क्या करें? उसने कुछ देर सोचा और फिर उसके दिमाग में एक योजना आई।

सबसे पहले वह बकरी को ले कर उस पार गया। और वहाँ बकरी को छोड़ कर, वापस इस पार अकेला लौट आया। उसके बाद वह दूसरे सफर में भेड़िया को उस पार ले गया। और वहाँ खड़ी बकरी को अपने साथ वापस इस पार ले आया।

इस बार उसने बकरी को वहीँ बाँध दिया और घास का ढेर लेकर उस पार चला गया। और भेड़िया के पास उस ढेर को छोड़ कर अकेला इस पार लौट आया। और फिर अंतिम सफर में बकरी को अपने साथ ले कर उस पार चला गया।

सीख – मुसीबत चाहे कितनी भी बड़ी हो, खोजने पर समाधान मिल ही जाता है।

Kids Stories in Hindi #3: राजकुमारी का चाँद

एक समय की बात है। एक राजा की नन्ही लाडली बेटी आसमान से चांद तोड़ लाने की ज़िद कर बैठी। पर ज़िद पूरी ना होने के कारण वह खूब रोई और बुरी तरह बीमार पड़ गयी। वैद्य, हकीम सब उसे ठीक करने में नाकाम रहे।

अंत में पुत्री प्रेम में भावुक बने राजा ने यह घोषणा करा दी कि –

जो व्यक्ति उसकी बेटी के लिए चांद तोड़ कर लाएगा। उसे वह धनवान बना देंगे।

राजा के इस पागलपन को सुन कर दरबारी और नगरवासी उस पर हंसने लगा। लेकिन राजा को बस अपनी लाडली बेटी के ठीक होने से मतलब था, और वह इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था।

नगर में रहने वाले एक बुद्धिमान व्यापारी से राजा का दुख देखा नहीं गया। वह तुरंत उन से मिलने आया। और बोला कि मैं आपकी बेटी के लिए चांद तोड़ लाऊँगा।

इतना बोल कर वह राजकुमारी के पास गया। उसने नन्ही राजकुमारी से कहा, “चांद कितना बड़ा है?”

राज कुमारी ने जवाब दिया, “मेरी उंगली की मोटाई जितना।”

चूँकि जब मै अपनी उंगली उसके आगे रख देती हूँ तो वह दिखता नहीं है।

फिर व्यापारी बोला, “चांद कितना ऊंचा है?”

तब राजकुमारी ने कहा, “शायद पेड़ जितना ऊंचा है। चूँकि, महल के बाहर लगे पेड़ के ऊपर ही तो वह दिखता है।”

फिर उसने पूछा चांद कैसा दिखता है?

तब राजकुमारी बोली, “वह तो सफ़ेद चमकीला चाँदी जैसा दिखता है।”

व्यापारी हंस कर बोल उठा। ठीक है, मै कल ही चांद तोड़ कर आप के लिए ला दूंगा। उसके बाद वह राजा को मिल कर अपनी युक्ति बता कर वहाँ से चला जाता है।

दूसरे दिन व्यापारी एक चांदी का छोटा सा चांद ले कर महल में आता है। और राजकुमारी से कहता है की मै आकाश से चांद तोड़ लाया हूँ। राजकुमारी चांद देख ख़ुशी से उछलने लगती है। और दिन भर उसके साथ खेलती है। अपनी ज़िद पूरी होने से उसकी तबीयत  भी ठीक हो जाती है।

पर बावजूद इसेक राजा को एक चिंता थी, उन्होंने कहा, “अगर राजकुमारी नें खिड़की के बाहर आसमान में चांद देख लिया तो वह फिर से उदास होगी।”

तब व्यापारी ने कहा कि उसके पास इसका भी समाधान है।  वह राजकुमारी के पास गया और खेल-खले में पूछा, “आपको पता है जब किसी बच्चे का दांत टूट जाता है तो क्या होता है?”

“हाँ, दूसरा दांत निकल आता है।”, राजकुमारी बोली।

“बिलकुल सही!”, “अच्छा जब कोई चाँद तोड़ लेता है तो पता है क्या होता है?”, व्यापारी ने पुचकारते हुए पूछा।

तब राजकुमारी मुस्कुरा कर बोली, “हाँ, वहाँ दूसरा चांद उग आता है।”

“अरे वाह! आपको तो सब पता है! चलिए आज नए चाँद को देखें!”, और ऐसा कह कर व्यापारी ने खिड़कियाँ खोल दीं।

राजकुमारी ने नया चाँद देखा और कहा, “मेरा चाँद तो उससे भी अच्छा है, और खेलने में व्यस्त हो गयी।

यह सब देखकर राजा प्रसन्न हो गया और व्यापारी को ढेर सारा इनाम दिया।

सीख –  कई बार बड़ी मुसीबतें भी छोटी सी युक्ति आज़मा कर टाली जा सकती हैं

 

 

 

Selfless बनिए selfish नहीं! | दो खरगोशों की कहानी

 एक बार की बात है, दो खरगोश थे. एक का नाम वाईजी था और दूसरे का नाम फूली. वाईजी अपने नाम के अनुसार वाइज यानी बुद्धिमान था और फूली अपने नाम के अनुरूप फूलिश यानी बेवकूफ था.

दोनों में गहरी दोस्ती थी. एक दिन उन्हें गाजर खाने का बड़ा मन किया और वे फ़ौरन इनकी खोज में निकल पड़े.

कुछ दूर चलने पर उन्हें अगल-बगल लगे दो गाजर दिखे. एक गाजर के ऊपर बड़े-बड़े पत्ते लगे थे जबकि दूसरे के पत्ते काफी छोटे थे.

फूली बिना देर किये बड़े पत्तों वाले गाजर के पास दौड़ा और उसे उखाड़ते हुए कहने लगा, “ये वाला मेरा है… ये वाला मेरा है…”

वाईजी उसकी इस हरकत को देख कर मुस्कुराया और बोला, “ठीक है भाई तुम उसे ले लो मैं ये बड़ा वाला ले लेता हूँ?”

और जब उसने गाजर उखाड़ा तो सचमुच वो फूली के गाजर से बड़ा था.

यह देख कर फूली को बड़ा आश्चर्य हुआ, वह बोला, “लेकिन मेरे गाजर के पत्ते तो काफी बड़े थे!”

“तुम गाजर के पत्ते देखकर उसकी साइज़ का अनुमान नहीं लगा सकते!”, वाईजी ने समझाया.

गाजर चट कर दोनों दोस्त आगे बढ़ गए.

थोड़ी दूरी पर उन्हें फिर से दो गाजर दिखाई दिए.

फूली बोला, “जाओ इस बार तुम पहले अपना गाजर चुन लो.”

वाईजी बारी-बारी से दोनों गाजरों के पास गया और सावधानी से उन्हें देखने लगा…. उसने उनके पत्ते छुए और कुछ देर सूंघने के बाद बड़े पत्ते वाला गाजर ही चुन लिया.

“ये क्या तुमने इस बार छोटा गाजर क्यों चुन लिया.” फूली बोला.

“मैंने छोटा नहीं बड़ा गाजर ही चुना है!” वाईजी ने जवाब दिया.

और सचमुच इस बार भी वाईजी का ही गाजर बड़ा था.

 

दड़बे की मुर्गी !

 

एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला, ” लोगों को खुश रहने के लिए क्या चाहिए?”

“तुम्हे क्या लगता है?”, गुरु ने शिष्य से खुद इसका उत्तर देने के लिए कहा

शिष्य एक क्षण के लिए सोचने लगा और बोला, “मुझे लगता है कि अगर किसी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो रही हों… खाना-पीना मिल जाए …रहने के लिए जगह हो…एक अच्छी सी नौकरी या कोई काम हो… सुरक्षा हो…तो वह खुश रहेगा.”

यह सुनकर गुरु कुछ नहीं बोले और शिष्य को अपने पीछे आने का इशारा करते हुए चलने लगे.

वह एक दरवाजे के पास जाकर रुके और बोले, “इस दरवाजे को खोलो…”

शिष्य ने दरवाजा खोला, सामने मुर्गी का दड़बा था. वहां मुर्गियों और चूजों का ढेर लगा हुआ था… वे सभी बड़े-बड़े पिंजड़ों में कैद थे….

“आप मुझे ये क्यों दिखा रहे हैं.” शिष्य ने आश्चर्य से पूछा.

इस पर गुरु शिष्य से ही प्रश्न-उत्तर करने लगे.

“क्या इन मुर्गियों को खाना मिलता है?'”

“हाँ.”

“क्या इनके पास रहने को घर है?”

“हाँ… कह सकते हैं.”

“क्या ये यहाँ कुत्ते-बिल्लियों से सुरक्षित हैं?”

“हम्म”

“क्या उनक पास कोई काम है?”

“हाँ, अंडा देना.”

“क्या वे खुश हैं?”

शिष्य मुर्गियों को करीब से देखने लगा. उसे नहीं पता था कि कैसे पता किया जाए कि कोई मुर्गी खुश है भी या नहीं…और क्या सचमुच कोई मुर्गी खुश हो सकती है?

वो ये सोच ही रहा था कि गुरूजी बोले, “मेरे साथ आओ.”

दोनों चलने लगे और कुछ देर बाद एक बड़े से मैदान के पास जा कर रुके.  मैदान में ढेर सारे मुर्गियां और चूजे थे… वे न किसी पिंजड़े में कैद थे और न उन्हें कोई दाना डालने वाला था… वे खुद ही ढूंढ-ढूंढ कर दाना चुग रहे थे और आपस में खेल-कूद रहे थे.

“क्या ये मुर्गियां खुश दिख रही हैं?” गुरु जी ने पूछा.

शिष्य को ये सवाल कुछ अटपटा लगा, वह सोचने लगा…यहाँ का माहौल अलग है…और ये मुर्गियां प्राकृतिक तरीके से रह रही हैं… खा-पी रही रही है…और ज्यादा स्वस्थ दिख रही हैं…और फिर वह दबी आवाज़ में बोला-

“शायद!”

“बिलकुल ये मुर्गियां खुश है, बेतुके मत बनो,” गुरु जी बोले, ” पहली जगह पर जो मुर्गियों हैं उनके पास वो सारी चीजें हैं जो तुमने खुश रहने के लिए ज़रूरी मानी थीं.

उनकी मूलभूत आवश्यकताएं… खाना-पीना, रहना सबकुछ है… करने के लिए काम भी है….सुरक्षा भी है… पर क्या वे खुश हैं?

वहीँ मैदानों में  घूम रही मुर्गियों को खुद अपना भोजन ढूंढना है… रहने का इंतजाम करना है… अपनी और अपने चूजों की सुरक्षा करनी है… पर फिर भी वे खुश हैं…”

गुरु जी गंभीर होते हुए बोले, ” हम सभी को एक चुनाव करना है, “या तो हम दड़बे की मुर्गियों की तरह एक पिंजड़े में रह कर जी सकते हैं एक ऐसा जीवन जहाँ हमारा कोई अस्तित्व नहीं होगा… या हम मैदान की उन मुर्गियों की तरह जोखिम उठा कर एक आज़ाद जीवन जी सकते हैं और अपने अन्दर समाहित अनन्त संभावनाओं को टटोल सकते हैं…तुमने खुश रहने के बारे में पूछा था न… तो यही मेरा जवाब है… सिर्फ सांस लेकर तुम खुश नहीं रह सकते… खुश रहने के लिए तुम्हारे अन्दर जीवन को सचमुच जीने की हिम्मत होनी चाहिए…. इसलिए खुश रहना है तो दड़बे की मुर्गी मत बनो!”

 

 

शनिवार, 26 मार्च 2022

क्या आप सही रास्ते पर हैं?

 बहुत समय पहले की बात है, घास के मैदानों से भरा एक जंगल था जिससे भैंसों का एक झुण्ड गुजर रहा था. झुंड अभी कुछ ही आगे बढ़ा था कि अचानक शेरों ने उनपर हमला कर दिया.

बाकी भैंसे तो बच गयीं पर एक बेचारी भैंस झुण्ड से अलग हो गयी. शेर उसका पीछा करने लगे और वो घबराहट के मारे इधर-उधर भागने लगी… कभी दाएं…. कभी बाएँ…कभी ढलान पर … तो कभी चढ़ाई पर…

भैंस इतनी डरी हुई थी कि उसने पलट कर देखा तक नहीं कि शेर कब के वापस लौट गए हैं…उसे तो बस अपने जान की फ़िक्र थी! काफी देर तक भागने के बाद जब वो रुकी तब उसे एहसास हुआ कि वह जंगल से बाहर निकल एक गाँव में आ चुकी है.

अगले दिन जंगली कुत्तों का झुण्ड घास के बीच मिल रही उस भैंस की गंध का पीछा करते-करते उसी रास्ते पर चल पड़ा.
अगले दिन भेडें भी घास के बीच बने रास्ते को देखकर उसी पर चल पड़ी..

ऐसे करते-करते बहुत से जानवर उसी रास्ते पर चलने लगे… और एक दिन जब जंगल में शिकार कर रहे नवयुवकों ने वो रास्ता देखा तो वो भी उसी पर चल पड़े और गाँव पहुँच कर बहुत खुश हुए कि उन्होंने जंगल से निकलने का एक सरल रास्ता खोज लिया है.

फिर क्या था गाँव वाले भी उसे रास्ते जंगल आने जाने लगे… धीरे-धीरे उस रास्ते पर बैल गाड़ियाँ चलने लगीं जिसपर किसान लकड़ियाँ काट कर गाँव ले जाते और फिर उसे शहर में बेच देते.

भैंस द्वारा बनाया गया वो रास्ता आज उस इलाके का मुख्य मार्ग बन चुका था…और बेहद बेढंगा…ऊँचा-नीचा और कठिन होने के बावजूद सब उसी रस्ते पर ख़ुशी-ख़ुशी चल रहे थे.

पर वो जंगल गाँव वालों की ख़ुशी देखकर मुस्कुरा रहा था… क्योंकि वो जानता था जंगल से गाँव जाने का इससे कठिन और कोई रास्ता हो ही नहीं सकता था…. आज एक भैंस की वजह से हज़ारों लोग 30 मिनट के रास्ते को तीन घंटे में बड़ी कठिनाई के साथ पार कर रहे थे…पर फिर भी वे खुश थे.

दोस्तों, आप किस रास्ते पर हैं ? क्या ये आपका सोचा-समझा रास्ता है या कोई illogical path है जिसपर हज़ारों लोग चल रहे हैं और इस वजह से वह logical लग रहा है?

मत स्वीकार करिए उस रास्ते को जो आपने सिर्फ इस लिए चुना है क्योंकि सब उसे ही चुनते हैं…एक बार ठहरिये और समझने की कोशिश करिए…कहीं आप भी 30 मिनट का रास्ता 3 घंटे में तो नहीं cover कर रहे हैं… पूछिए खुद से —

क्या आप सही रास्ते पर हैं?